बनेगी पेपर प्रिंट की स्याही, नहीं उड़ेगा अब गाड़ियों का धुआं | The Tech Blog World Hindi
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बनेगी पेपर प्रिंट की स्याही, नहीं उड़ेगा अब गाड़ियों का धुआं

रूमेन्द्र वर्मा, प्रवीण साहू और अनिमेश वर्मा ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करेगा। साथ ही उससे बचने वाले काले पदार्थ को पेपर प्रिंट और काली स्याही के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। मात्र 10 रुपये की लागत में इस मॉडल को तैयार किया जा सकता है। इसमें एक खाली कोल्ड ड्रिंक की कैन, थोड़ा-सा कॉर्टन और कंडक्टर, जिसमें पतली खाली में रूप लगी होती है, उसे गाड़ी के साइलेंसर में लगाकर उपयोगी बनाया जा सकता है।

मात्र 10 रुपये की लागत में इस मॉडल को तैयार किया जा सकता है। इसमें एक खाली कोल्ड ड्रिंक की कैन, थोड़ा-सा कॉर्टन और कंडक्टर

बनेगी पेपर प्रिंट की स्याही, नहीं उड़ेगा गाड़ियों का धुआं
गाड़ी से धुँआ निकलते हुए
रायपुर, द टेक ब्लॉग वर्ल्ड: दिन भर आप कार और बाइक से सैर-सपाटा करते रहते हैं, लेकिन कभी ख्याल नहीं आया कि गाड़ी से निकलने वाला धुआं भी काम का बनाया जा सकता है। इस पर गौर किया पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अक्षय ऊर्जा डिपार्टमेंट के छात्रों ने। रूमेन्द्र वर्मा, प्रवीण साहू और अनिमेश वर्मा ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करेगा। साथ ही उससे बचने वाले काले पदार्थ को पेपर प्रिंट और काली स्याही के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जी हां, मात्र 10 रुपये की लागत में इस मॉडल को तैयार किया जा सकता है। इसमें एक खाली कोल्ड ड्रिंक की कैन, थोड़ा-सा कॉर्टन और कंडक्टर, जिसमें पतली खाली में रूप लगी होती है, उसे गाड़ी के साइलेंसर में लगाकर उपयोगी बनाया जा सकता है।
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कोई भी गाड़ी पौन घंटे चलती है तो उसमें से 30 एमएल स्याही तैयार हो जाती है, जिसे आसानी से प्रिंटर में उपयोग किया जा सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी ने छात्रों के इस नए प्रयोग पर कहा कि ये अनोखा प्रयोग है। इससे प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।

ऐसे काम करता है यह मॉडल

कोई भी कैन में कॉटर्न और कंडक्टर को लगाकर, उसे डीजल वाले वाहन पर लगा दिया जाए। प्रदूषण वाले 2.5 से 10 माइक्रान के कण स्याही में बदल जाते हैं। वहीं यदि गाड़ी दो हजार घंटे चलती है तो 600 मिलीलीटर तक स्याही तैयार की जा सकती है। छात्रों ने बताया कि इस मॉडल से प्रदूषण के साथ-साथ उपयोगी स्याही भी बनाई जा सकती है।

सोलर बेस्ड पोंड क्लीनिक सिस्टम से अब तालाब भी होगा शुद्घ

टेमन लाल निषाद, द्रोण कुमार, गुलशन कुमार और लाल कृष्ण ठाकुर ने भी ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे शहर के तालाबों को शुद्घ किया जा सकता है। मॉडल का नाम है सोलर कंपाउड क्लीनिक सिस्टम। तालाब की सतह पर फैले कूड़े कचरे को तरंगों से किनारे पहुंचाया जाता है। साथ ही यदि तालाब में फिल्टर प्लांट है तो उसके नजदीक भी गंदगी आ जाए तो, सेंस कर अलार्म चालू कर देता है। इससे कचरे के एक जगह इकट्ठे होने का संकेत मिल जाता है।

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Written & Posted By : चंदन कुमार द्विवेदी

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